Wednesday, 13 September 2017

RAPE - Is it our character or a crime..?? | Article in Hindi

आजकल अखबारों में, न्यूज चैनल्स पर गुडगाँव के "रेयान इंटरनेशनल स्कूल" का नाम बहुत आ रहा है.....!! जी हाँ ये वो ही स्कूल हैं जहाँ एक बस कंडक्टर द्वारा सात साल के मासूम के साथ पहले दुष्कर्म का प्रयास किया जाता है....और फिर उसके चिल्लाने पर चाकू से उसका गला रेत दिया जाता है..!! ठीक दो दिन बाद दिल्ली के एक स्कूल में एक चपरासी द्वारा छ: साल की मासूम के साथ रेप किया जाता है........याद करिये ये वो ही दिल्ली, हरियाणा वाला ईलाका है जहाँ कुछ दिन पहले एक बलात्कारी को बचाने के लिये तीन लाख लोग सड़क पर आ गये थे.....!!
मैं पूछता हूँ....अब कहाँ हैं वो सभी लोग...?? एेसे लोगो की वजह से ही रोजाना पता नही कितने बलात्कारी पनपते हैं......!!

इससे पहले, जयपुर मे एक महिने पहले 3-3 साल की दो मासूमों के साथ रेप की खबर सामने आई थी।
रोजाना अखबारों मे ऐसी रेप की पता नही कितनी ही न्यूज आती हैं...!!!
सही बताऊ तो रोना आता हैं, मुझे तो.......मतलब यार लड़कियाँ ना तो माँ की कोख मे सुरक्षित हैं, ना ही अपने घर में और ना ही अपने स्कूल में..........अब वे भरोसा करे तो किस पर करे...!!

कभी-कभी तो मुझे एेसा लगता हैं जैसे कि
 "रेप" ही इस देश का चरित्र और संस्कृत हो गया हैं......!!
और अखबारों मे तोे रेप की सिर्फ वो न्यूज आती हैं जो थानो तक पहुंच पाती हैं। रेप के आधे से ज्यादा केस तो रिपोर्ट ही नही होते।

क्या आपने कभी सोचा  है कि इंडिया में रोजाना कितने रेप होते होंगे......
5....?
10...?
15.....?
नहीं......हर 14 मिनट मे एक बेटी को रेप का सामना करना पड़ता हैं।
हर दिन मे लगभग 103 बेटियों का जीवन नरक बन रहा है.....!!
अगर 1-1 बेटियों के दुखों को हर दिन अखबारों मे छापा जाये तो मेरे खयाल से पेज भी कम पड जायेंगे..!!

बेटियों का दर्द सिर्फ पढ़िये नहीं....
सोचिये समझिये ओर खुद को बेटियों की जगह रखकर उनके दर्द के महसूस करना सीखिये......
ताकि हमारी बहनो को इन दर्दनाक 14 मिनट से छुटकारा मिल सके।

सोचिएगा कि एक बलात्कार पीड़ित माँ बहन बेटी पर उसके बाद क्या गुज़रती है।

मेरे को तो ये समझ नहीं आता कि हमारा देश इतना धार्मिक होने के बावजूद भी एेसी घटनायें कैसे हो जाती हैं......यहाँ हर साल नवरात्रों में लड़कियों को पूजा जाता है, रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन लेता हैं....और हमारे शास्त्रों में लिखा है कि जहाँ नारी पूजा होती हैं वहाँ भगवान निवास करते हैं...!!
ओर तो ओर हम हर साल 15 अगस्त के दिन हमारी स्वतंत्रता का दिखावा करते हैं......जबकि सच्चाई ये हैं कि उस दिन भी हमारी बहन स्वतंत्रता की सांस नही ले पाती....जो कि इसी 15 अगस्त के दिन चंडीगढ़ मे हुआ था.....परेड से लोटते वक्त 12 साल की लड़की से रेप..!!

क्या आपने कभी सोचा हैं कि आखिर इंडिया मे इतने रेप क्यों होते हैं......एेसा क्या हैं हमारी सोसाइटी में, जिसके कारण लोग ना तो रिश्तो को देखते हैं ना ही उम्र को...!! बस लड़की देखते ही हैवानो की तरह उस पर टूट पड़ते है...!!

दो बूब्स, एक वेजाइना और पेनिस, शायद इन्हीं के होने से रेप होता हैं..!! नहीं......बूब्स रेप का कारण नहीं हो सकते। जिन छोटी-छोटी बच्चियों के स्तन नहीं होते, उनका भी रेप हो जाता है।
फिर तो वेेजाइना के कारण ही रेप होते होंगे। नहीं......बाल शोषण के 52% केसो में लडको (boy baby) के साथ रेप हुआ है, जबकि वहां कोई वेजाइना नहीं होती, जैसा कि 5 दिन पहले रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के प्रद्युमन के साथ हुआ.....वहां तो कोई वेजाईना नही थी....फिर भी उसके साथ रेप का प्रयास किया गया।
तो यानि रेप पेनिस के कारण होते हैं, लेकिन मैंने कई हॉस्टल और जैल के कितने ही किस्से सुने हैं जहाँ लडको के साथ भी रेप हुआ है। यानी जिनके पास पेनिस हैं, उनका भी रेप हुआ है।
और अगर रेप सिर्फ पेनिस के कारण होते हैं तो रेप/गैंगरेप के बाद लड़की के शरीर में सरिये, कंकर और काँच जैसी चीजें क्यों डालते हैं...!!
यानी रेप पेनिस, वेजाइना (शरीर की संरचना) के कारण नहीं होते....!!
तो शायद छोटे कपड़े पहनने के कारण रेप होते होंगे...!! तो क्या अब छोटी-छोटी बच्चियों को भी साड़ी पहनाना शुरू कर दे। क्यों कि रेप तो उनके साथ भी होता हैं। तो मतलब छोटे कपड़े भी रेप का कारण नहीं हैं....!!

तो आखिर एेसा क्या हैं जिसके कारण रेप होते है....!! रेप उस मानसिकता के कारण होते हैं जो लड़की की शर्ट दो बटनो के बीच  के गेप से उनके बूब्स  झांकने की कोशिश करते हैं.....!!
जो सूट के कोने से दिख रही ब्रा की स्ट्रीप को घूरते हैं और लड़की के बूब्स का इमेजिनेशन करते हैं....!!
जो स्कर्ट पहनी लड़की की टांगे घूरते रहते है कि कब थोड़ी सी स्कर्ट खिसके, कब पेंटी का कलर देख सके, पेंटी न सही, कुछ तो दिखे....!!
जो पार्क में बेठे कपल्स को देखकर सोचते हैं काश ये लड़की मुझे मिल जाए तो पता नहीं मैं क्या क्या कर दूँ......!!
वो मानसिकता..........
जब एक दोस्त, दुसरे से कहता है- तू अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रात में रूका और तुने कुछ भी नहीं किया, नामर्द हैं क्या.....???
जब एक दोस्त, अपने दुसरे फ़्रेंड्स से कहता है....लडकी शक्ल से तो अच्छी हैं पर उसके पास सामान नहीं है...!!

दोस्तो रेप सिर्फ इसी गन्दी मानसिकता के कारण होते हैं और यही सच्चाई हैं......जब एक अकेली लडकी बस मे चढ़ती हैं तो क्यो सबकी नज़रे उसको ताकने लगती हैं...??
अरे वो भी तो किसी की बहन, बेटी हैं। हमारा कोई अधिकार नहीं कि, हम किसी की बहन, बेटी को इस गन्दी मानसिकता से देखे....!!
अगर हम मानते हैं कि ये हमारा अधिकार है तो हमें ये भी याद रखना चाहिए कि हमारी बहन, बेटी को भी इसी तरह से देखने का अधिकार सबको हैं....!!

कभी-कभी तो ऐसा खयाल आता इन बलात्कारियो को एक एक को गोली से उडा दूं.....!! हमारी सोसाइटी के माहोल की वजह से एक लड़की कुछ बोल नही पाती लेकिन जिस दिन से उसने पलटकर जवाब देना शुरु कर दिया ना.....यकीन मानिये भारत का इतिहास बदल जायेगा।

और मुझे विश्वास हैं वो दिन जरूर आयेगा। जब एक आदमी को रेप तो क्या, किसी लड़की नजर उठाकर भी देखने का खयाल तक नहीं आयेगा।
अरे....रेप करने वालो सुन लो
मुझे पता नही तुम्हारे बहन-बेटी हैं या नही....
पर तुमको जन्म देने वाली तुम्हारी माँ जरूर रोती होगी... तुम्हारे इस काम के लिये.....!! वो रोती होगी यह सोचकर कि मैंने देश को एक बलात्कारी दिया हैं.....!!!

दोस्तो......इस आर्टीकल को लिखने का मकसद किसी को दुख पहुँचाना नहीं है.......बस मैने हमारी सोसाइटी की एक सच्चाई को सबके सामने लाने का प्रयास किया है.....प्लीज आप इसे जरूर शेयर करेें...!!
पुरा आर्टीकल पढने के लिये आपका धन्यवाद....!!
#KeepSmiling
#BeHappyKeepHappy

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